भारत सरकार द्वारा वर्ष 1964 में गठित मेडिकोलीगल सर्वेक्षण समिति ने संपूर्ण भारत देश में तत्कालीन मेडिकोलीगल कार्यों के गुणवत्ता विहीन होने पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। मेडिकोलीगल कार्यों के गुणवत्ता विहीन होने के फलस्वरूप विभिन्न स्तरों पर असंतोषजनक परिणाम आने के कारण इसका खामियाजा समाज को भुगतना पड़ता था।
समिति ने मेडिकोलीगल कार्यों के उन्नयन हेतु प्रत्येक राज्य में मेडिकोलीगल संस्थान की स्थापना की अनुशंसा की थी एवं यह भी अनुशंसा की थी कि संचालक मेडिकोलीगल संस्थान राज्य के मेडिकोलीगल सलाहकार की भूमिका अदा करेगा एवं यह उसका (संचालक का) पदीय दायित्व होगा।
मेडिकोलीगल प्रकरणों में विशेषज्ञ अभिमत एवं परामर्श देने हेतु मेडिकोलीगल संस्थान राज्य स्तरीय सर्वोच्च संस्थान है । समिति की सिफारिश के अनुसार केन्द्रीय गृह मंत्रालय की यह अपेक्षा थी कि प्रत्येक राज्य में मेडिकोलीगल संस्थान की स्थापना की जाय । अतः इस पर वर्ष 1977 में म.प्र. शासन को देश का प्रथम मेडिकौलीगल संस्थान की स्थापना का श्रेय प्राप्त हुआ।
इसी कड़ी में म.प्र. राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के अन्तर्गत छ.ग. राज्य को मेडिकोलीगल संस्थान भोपाल का एक हिस्सा प्राप्त हुआ एवं संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सेवाएं छ. ग. राज्य को सौंपी गयी, तथा संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारीगण मेडिकोलीगल संस्थान के दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। इसी तारतम्य में वर्ष 2005 में 30 पदों का सेटअप स्वीकृत किया गया । गृह विभाग छ.ग. शासन, संचालनालय मेडिकोलीगल संस्थान का प्रशासकीय विभाग है।
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